Wednesday, March 17, 2021

प्राण, वायु और मानवीय शरीर का संबंध

वात दोष और हमारा शरीर

पंच तत्वों में से सबसे प्रमुख तत्व है वायु जो हमारे शरीर को जीवित रखता है और वात के रूप में हमारे शरीर के तीन दोषों में से एक दोष भी है जो की सांसों के रूप में हमारा प्राण है।








पित्त, कफ, शरीर के बाकी पदार्थ और धातु एक जगह से दूसरे जगह स्वयं नहीं जा सकते इन्हें वायु ही शरीर में इधर उधर लेकर जाता है जैसे आपने देखा होगा आसमान में लगे बादल हवा यानी वायु के साथ चलते हैं। इसलिए हमारे शरीर में उपस्थित तीनों दोषों में से वायु दोष ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे शरीर के हरेक कण में मौजूद है और यही वो कारक है जिसके कारण हमारे शरीर में भी प्राण है। जबतक हमारे शरीर में वायु है तब तक हमारी प्राण शक्ति जीवित है और हमारी आयु है, सोचिए क्या हो अगर ये वायु हमारे शरीर से निकल जाए या निकाल दिया जाए हमारा शरीर काम करना बंद कर देगी और प्राण शक्ति जब कार्य करना बंद कर देगी तब हम मृतक कहलाएंगे इसलिए कहा जाता है की शरीर में प्राण ही सबकुछ है।


वायु का प्रकृति और हमसे संबंध


वायु ही वो कारक है जो हमारे शरीर में मौजूद रक्त, धातु, मल इत्यादि को उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं क्या हो यदि ये क्रिया ही रुक जाए?

हमारे शरीर में सोने के दौरान भी जब हमारा शरीर निष्क्रिय रहता है और हमारी सारी इन्द्रिय भी विश्राम कर रही होती है तब भी वायु हमारे शरीर में अपना काम कर ही रहा होता है। वायु ही सबसे बाहरी कारक है जो सीधे तौर पर हमें प्रकृति से जोड़ती है जिसे हम स्वशन क्रिया कहते हैं । ये वायु ही तो है जो हम प्रकृति से लेकर अपने शरीर की क्रियाओं में इस्तेमाल करते हैं।

क्या आपने कभी अपने सांसों को रोक कर अनुभव करने की कोशिश की है?

अवश्य की होगी बचपन में हम ऐसे कार्य नित्य प्रति करते रहते हैं आपको याद होगा जब आपने अपनी नाक को बंद करके और अपने सांसों को रोका होगा तो कैसा घुटन महसूस हुआ था। क्या आप उस अनुभव से अंदाजा लगा सकते हैं की वायु न रहने पर हमारे शरीर की दशा कैसी होगी और शरीर के बाकी क्रिया सुचारू रहेंगे? क्या इससे स्पष्ट नही होता की हमारे प्राण का आधार वायु है या मैं ये कहूं की वायु ही प्राण है।

हमेशा से हम सुनते आए हैं की जब शरीर से प्राण निकल जाता है तब व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है ये प्राण क्या है वायु ही है ना हमारी श्वसन क्रिया ही तो रुकती है जब हमारे शरीर की मृत्यु होती है अर्थात वायु शरीर को छोड़ देती है और उसके पश्चात मानवीय शरीर जड़ हो जाता है ।

आप इस तथ्य से भली - भांति परिचित होंगे की हमारा शरीर भोजन के बिना 8 से 21 दिन तक और जल के बिना 3 दिन तक जीवित रह सकता है पर क्या आप बता सकते हैं हम वायु के बिना कितनी देर तक जीवित रह सकते हैं? वायु के बिना तत्काल हमारी मृत्यु हो जाएगी इससे स्पष्ट होता है की हमारे शरीर में वायु दोष के रूप में नहीं बल्कि गुण के रूप में कार्यरत है जिसके बिना आप जीवन की कल्पना या शरीर की कल्पना नहीं कर सकते।


निष्कर्ष


ये जोड़ है जिसमे हम और हमारा शरीर और प्रकृति है और क्योंकि ये हमारे जीवन और प्राण का आधार है तो क्या ये जरूरी नहीं हम इसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करें। यदि वायु दूषित है तो हमारी स्वशन दूषित होगी और उससे हमारा शरीर दूषित होगा और उससे हमारी आत्मा। प्रकृति से छेड़छाड़ हमारे विघटन का कारक है।




1 comment:

Follow Blog by email