Wednesday, March 17, 2021

आध्यात्म के साथ खुद को कैसे खुश रख सकते हैं हम

 स्वयं को प्रसन्न रखने का एकमात्र उपाय है आध्यात्म।

जी हां ये वो दीर्घकालीन संस्कृति है जिससे विषम और विकट या विपरीत परिस्थिति में भी आप स्वयं को खुश और नियंत्रित रख सकते हैं। अपने आत्म का अध्ययन करने से आप स्वयं से परिचय करेंगे, जब आप स्वयं से परिचित हो जायेंगे तो अपनी खुशियों के बारे में बखूबी समझ सकेंगे। आप अध्यात्म के तालाब में जितना गहरा उतरते जायेंगे उतने ही नए और चमत्कारिक अनुभव आपको होगा।






स्वयं को आध्यात्म से जोड़ने का सबसे सरल उपाय है प्राणायाम


वास्तव में प्राणायाम स्वास और प्रस्वास के व्यायाम की एक पद्धति है जिससे हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और इससे हमारे रक्त संचार में भी चमत्कारिक सुधार होते हैं जिससे हम लंबी उम्र तक  स्वस्थ जीते हैं। इससे हमारा शरीर और मस्तिष्क दोनो स्वस्थ होंगे और जब तन और मन स्वस्थ होगा तो उसमे स्वस्थ आत्मा निवास करेगी जो अपने साथ साथ दूसरों को भी साकर्तमकता का अभ्यस्त करवाएगी।


क्या आप जानते हैं की हमारे फेफड़े में हम केवल एक चौथाई भाग से ही काम ले पाते हैं?


हमारे फेफड़े में प्रायः सात करोड़ तीस लाख "स्पंज" जैसे कोष्टक होते हैं (जैसे मधुमक्खी का छत्ता होता है कुछ वैसा ही) । ज्यादातर व्यक्ति गहरी सांस नहीं लेते हैं बल्कि हल्का सांस लेते हैं जिससे हमारे फेफड़े के लगभग दो करोड़ छेदों में ही वायु का संचार होता है जबकि पांच करोड़ तीस लाख छेदों में प्राणवायु नही पहुंचने के कारण वो कोष्ठक निष्क्रिय पड़े रहते हैं जिसका परिणाम ये होता की इसमें हमारे शरीर के अवशिष्ट पदार्थ जमा हो जाते हैं जिससे टीबी,  खांसी, ब्रोंकाइटिस जैसे खतरनाक रोग की चपेट में हम आ जाते हैं और इस तरह फेफड़े से अधूरा काम लेने पर ये हमारे रक्त के सुध्दी पर असर डालता है और इसी कारण से आजकल इतनी अत्यधिक अकाल मृत्यु हो रहे हैं।

यही कारण है की हमारे सनातन धर्म में मंत्रों पर इतना अत्यधिक बल दिया जाता है इनके उच्चारण से न केवल हमारी धमनियों में रक्त का संचार बढ़ता है बल्कि हमारी स्वसन क्रिया भी स्वस्थ होती है फर्ज़ कीजिए आप गायत्री मंत्र का जप कर रहे हैं तो निश्चय ही आप एक गहरी स्वास लेकर इसे शुरू करेंगे ताकि आप अधिक ध्यान केंद्रित कर सके मंत्र पर और जब आप एक गहरी सांस लेने और वायु को अपने फेफड़े में भरेंगे तब फेफड़े में मौजूद सभी कोष्ठक में प्राणवायु का संचार होगा और यदि आप सिर्फ एक मास नियमित रूप से केवल इस एक मंत्र का जप करेंगे तो सौ प्रतिशत आपके स्वषण क्रिया सुचारू रूप से होगी आपके फेफड़े अपना पूरा काम करेंगे आपके रक्त संचार में आश्चर्यजनक सुधार होगा जिसका असर आपके चेहरे पर भी दिखेगा आपके चेहरे की आभा देखने लायक होगी और आपका तन, मन और मस्तिष्क सभी स्वस्थ होंगे और आप खुश होंगे।

अाजके भागदौड़ वाली जिंदगी में तो यह खाना खाने जितना जरूरी हो गया है यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो एक महीने केवल ऐसा करके देखें।


अवसाद को दूर करने में अत्यधिक असरदार है प्राणायाम






आप भलीभांति ये जानते होंगे की अवसाद का सबसे प्रमुख कारण यही है की हम खूदसे दूर हो जाते हैं इतना की स्वयं के होने का एहसास भी नही होता हमें इस दशा में भी प्राणायाम और आध्यात्म रामबाण का काम करते हैं। प्राणायाम करने से आपके मन में आई हुई बुरी बातें, कलेश अवसाद आदि ये सब खत्म होने लगते हैं और आप केवल साकारत्मक रहते हैं, नकारात्मक प्रस्तिथियों में भी। मन की सिद्धि के साथ आपकी एकाग्रता अदभुत रूप से बढ़ती है, इससे उद्वेग, टेंशन, गुस्सा,फ्रस्टेशन, भय जैसे बहुत सारे साइकोलॉजिकल ट्रॉमा का इलाज स्वतः होता है सिर्फ इतना ही नहीं आप इससे अपनी रिकॉलिंग मेमोरी यानी स्मरण शक्ति, अपनी कुशाग्रता, सूझबूझ, गहन विचार, भविष्य में होने वाली संभावनाएं जैसे मानसिक विशेषताओं का अनुभव स्वयं कर सकते हैं

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