Friday, March 19, 2021

जानिए क्या है डिप्रेशन और इसके लक्षण औरकारण-depression and its reason in hindi

डिप्रेशन का कारण क्या है

डिप्रेशन वो दीमक है जो एक बार यदि हमारे मस्तिष्क में घुसने में कामयाब हो गया तो उसके बाद तो यह हमारे पूरे अंतरात्मा को दूषित करके हमे खोखला और खाली कर देता है और फिर कई सारे लोग इस जीवन की जंग को बीच में ही छोड़ देते हैं और आत्महत्या जैसा संगीन कदम उठा बैठते हैं। कहा जाता है की आत्महत्या कमजोर व्यक्ति नहीं कर सकता तो जो व्यक्ति इसे करता है वो जरूर बहुत हिम्मती होता रहा होगा तो अगर वो उस हिम्मत को डिप्रेशन को परास्त करने में दिखाते तो कैसा होता? 


क्या आप जानते हैं W.H.O के डाटा के मुताबिक विश्व भर में 26 हजार 400 करोड़ लोग इस वक्त डिप्रेशन के चपेट में हैं और लगभग आठ लाख लोग हर साल डिप्रेशन की वजह से आत्महत्या करलेते हैं अपनी जिंदगी से हार कर। फर्ज़ कीजिए की हमारा दिमाग एक लॉन्ड्री बॉक्स है जिसमे हम अपने गंदे कपड़ों को जमा करते हैं और जब कभी हमे फुरसत मिलती है तो हम सभी गंदे कपड़ों को साफ करके उसे वापस से अलमारी में सजा लेते हैं पर हम हमारे दिमाग के साथ ऐसा नहीं होता हम उसमे दुनिया भर के विचार, दूसरों से मिलने वाले धोखे, रिजेक्शंस, हीनता, दुर्व्यवहार और ऐसे ढेर सारे विचारों को अपने दिमाग में जमा करते ही रहते हैं और अपने विचारों को कभी साफ करने की सोचते ही नहीं की कौनसी कुंठा और कौन सी चिंता घर करके बैठी है हम तो बस ऐसे ही नकारत्मक विचारों से इसे भरते जाते हैं चूंकि फोन की तरह हमारा मानव मस्तिष्क कोई अलर्ट नही देता की अपनी मेमोरी फ्री करें तो हमे इस बारे में कभी पता चलता ही नहीं है और इसी अनजाने पन में हम डिप्रेशन के दलदल में धंसते ही चले जाते हैं।

आप शायद ये सुनकर चौंक जाएंगे की पंद्रह से बीस साल के एज ग्रुप में डिप्रेशन दूसरा सबसे प्रमुख कारण है सुसाइड करने का! क्या ये काफी नहीं है हमे सचेत होने के लिए की हम और हमारा भविष्य किस और जा रहा है? जो अभी ढंग से बड़े भी नही हुए परिपक्वता का क, ख, ग नही जानते वो डिप्रेस्ड हो जाते हैं? इतना क्या एक दशक में बदल गया की हमारे सामने ऐसे चकित करने वाले आंकड़े रख दिए गए। हम कहां पिछड़ रहे हैं? आखिर क्यों हमारा सामाजिक जीवन इतना सिकुड़ता जा रहा है की हमे नही पता हमारे पड़ोसियों के नाम क्या है? क्या ये हमारा फर्ज नही की हम उनकी सहायता करें उनके लिए अपना हाथ आगे बढ़ाएं? क्या लक्ष्य हुआ हमारे जीवन का यदि हम एक कुशल और मानसिक रूप से स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान नही दे रहे।

ये हाई टाइम है की हम इन चीजों को गंभीर रूप से लें और हम जैसे लोग जो मानसिक रूप से मंजबूत हैं या डिप्रेशन को हरा चुके हैं वो इनका हाथ थामकर इनको इस दल दल से बाहर निकालें इनसे पूछे, इनके बारे में जाने ये कहीं और से तो नहीं आते हमारे ही बीच रहते हैं और जाने अनजाने हम भी कई बार हम उन्हे और विचलित कर देते हैं क्यों? क्योंकि हमें ज्ञान ही नहीं है की ऐसे मामलों से हम निपटे कैसे। सजग रहें अपने आस पड़ोस में रहने वाले लोगों से चित परिचित रहें शायद आपका एक मदद का हाथ किसी के जीवन को संवार दे सोचिए किस बरकत के हकदार होंगे फिर आप ऊपर वाले के घर में। पिछले दो दशकों से जो छोटे परिवार का चलन बढा है जहां घर के बुजुर्गों को छांट दिया जाता है और मां बाप के साथ बच्चे रहते हैं फिर मां बाप अपने कार्यों में व्यस्त और बच्चे फिर अपनी ही खोखली दुनिया बना लेते हैं जहां उसकी कोई सुनने वाला नहीं होता और फिर बच्चा भी समझ जाता है की ना बताने में ही भलाई है।


आप शायद इस फैक्ट से अच्छे से परिचित होंगे की 90 प्रतिशत डिप्रेशन के मामले शहरी जनसंख्या की देन है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में अब भी seprate family का चलन अभी उतने जोर पर नहीं हैं, मां बाप के पास बच्चों के लिए भरपूर समय है और बच्चे अपने दादा दादी के साथ खेल कर बड़े हो रहे हैं। मानसिक और शारीरिक दोनो तरह से एकदम मजबूत। 


हमारा लक्ष्य यही है की हम एक कुशल समाज के निर्माता बने और यदि हम शहर में भी रह रहे है तो अपने सामाजिक रिश्तों को सुधारें अब आप सोचते होंगे की ऐसे लोगों की पहचान कैसे करें? उसके लिए कुछ लक्षण हैं जो में आपसे शेयर कर रही हूं

डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं


1.उदासी या किसी भी चीज में रुचि नहीं होना ऐसी भावना जो प्रमुख अवसाद की विशेषता है, व्यवहार और शारीरिक लक्षणों की एक चेन है।

2. इनमें नींद, भूख, ऊर्जा स्तर, एकाग्रता, दैनिक व्यवहार या आत्म-सम्मान में बदलाव शामिल हो सकते हैं। 
3. डिप्रेशन को आत्महत्या करने के विचारों से भी जोड़ा जा सकता है।

4.ये लोग  ऐसी भावनाओं का अनुभव कर सकते हैं:
मनोदशा: चिंता, उदासीनता, सामान्य असंतोष, अपराधबोध, निराशा, 
5.इंटरेस्ट की कमी, हितों की हानि या गतिविधियों में खुशी, मिजाज या उदासी

6. अचानक से व्यवहार में बदलाव, अत्यधिक रोना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, या सामाजिक अलगाव

शारीरिक लक्षण

7.नींद ना आना या जल्दी जागना, अधिक नींद आना, अनिद्रा या बेचैन नींद
8. अत्यधिक भूख, थकान या भूख न लगना
संज्ञानात्मक: एकाग्रता की कमी, गतिविधि में सुस्ती या 9.आत्महत्या के विचार
10. वजन बढ़ना या वजन कम होना

भारत में डिप्रेशन की स्तिथि

डब्ल्यूएचओ द्वारा वैश्विक विकलांगता के लिए सबसे बड़े और प्रमुख कारण के रूप में डिप्रेशन को स्थान दिया गया है। आत्महत्या से होने वाली मौतों में भी इसका प्रमुख योगदान है। दुनिया भर में, 2005 से 2015 तक अवसाद में 18 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई।
WHO की एक हालिया रिपोर्ट की माने तो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का सबसे अवसादित देश है। भारत में चिंता, सिज़ोफ्रेनिया, अवसाद और द्विध्रुवी विकारों जैसे अधिकतम मामले पाए गए, जिनमें से अधिकांश मामले संज्ञान में नहीं आते हैं। 6.5% आबादी किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है और, इससे यह साबित हो जाता है कि रोगियों और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले पेशेवर चिकित्सको के बीच भारत में एक बहुत बड़ा अंतर है। प्रत्येक 1,00,000 रोगियों के लिए केवल एक ही डॉक्टर का उपलब्ध होना ये अनुपात काफी चौंका देने वाला है।

ये बढ़ती संख्या भारत के लिए बहुत दुखद है, जहां मदद करना आसान नहीं है क्योंकि अभी भी हम इसे पागलपन और और भूत प्रेत जैसे बेतुकी चीजों से जोड़कर देखते हैं। भारत में औसत आत्महत्या दर प्रति लाख लोगों पर 10.9 है।
रिपोर्ट में एक और विचलित कर देने वाला तथ्य ये भी है की भारत में मानसिक बीमारी को ठीक करवाने वाले लगभग 80% लोग किसी भी तरह के उपचार की तलाश ही नहीं करते हैं और 1500 करोड़ से अधिक हैं मानसिक बीमारी से पीड़ित लोग हैं जिन्हें उपचार की  आवश्यकता है और यह 2020 तक 20% तक बढ़ने का अनुमान था।

यदि अवसाद को बिना इलाज के छोड़ दिया जाता है, तो अवसाद कई समस्याओं का कारण बन सकता है, खासकर किशोर मामलों में। किशोर मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को नही समझ पाते और इससे अनजान रहने  के कारण ये वयस्कता तक इसी ग्रसित रहते हैं।

अवसाद शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

अवसाद शरीर और मस्तिष्क को मौत के जाल में धकेल देता है। इन चरणों में होने वाले शारीरिक और मानसिक हानि को गंभीर समस्या के रूप में देखा जाता है और इससे उबरना मुश्किल हो सकता है। जब मस्तिष्क, अत्यधिक नकारात्मकता के जाल में उलझ जाता है, तो इसकी कार्य शक्ति में गिरावट आती है। आमतौर पर, मस्तिष्क डोपामाइन के उच्च स्तर के स्राव होने के कारण तनावपूर्ण स्थितियों को संभालने में असमर्थ हो जाता है । अत्यधिक अवसाद मस्तिष्क के उस हिस्से पर चोट करता है जो  हमारे भावनाओं और प्रेरणाओं को नियंत्रित करता है, डोपामाइन का उत्पादन टॉस के लिए जाता है जिससे शरीर के लिए नकारात्मकता को संसाधित करना मुश्किल हो जाता है।

डिप्रेशन का इलाज

अवसाद के लिए कोई आसान इलाज नहीं है, लेकिन सामाजिक सहायता, भावनात्मक सहयोग और चिकित्सा से अवसाद का इलाज हो सकता है। अक्सर उदासी और निराशावाद के साथ कंफ्यूजन और अवसाद का अनुभव करने वाले लोग चिंता, निराशा, नकारात्मकता और असहायता की तीव्र भावनाओं से गुजर सकते हैं। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति से प्यार करने वाले लोगों को अवसाद से ग्रस्त लोगों की देखभाल करनी चाहिए।



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