Tuesday, March 23, 2021

नकारात्मक विचार और इसके कारण -How to stop negative thinking in Hindi

 

नकारात्मक विचार कौन से हैं इसे कैसे अस्वीकार करें?

जिन विचारों से किसी को नुकसान होने की संभावना है, किसी को दुख पहुंचाने की संभावना है, या उससे किसी का कल्याण नहीं, ऐसी भावनाएं जो आपको निराशा की ओर धकेलती हों। ऐसी ईर्ष्या या जलन जो आपको दूसरे के सुख या खुशी को देखकर महसूस होती हो यही हमारे मन के विकार हैं जो हमें ऋणात्मक ऊर्जा देती है और हमारे मस्तिष्क और बुद्धि को क्षीण कर कर हमारे शरीर को दुर्बल बनाती है।

यहां हम इन्ही विचारों के आने के चार कारणों के बारे में जानेंगे


क्यों आते हैं नकारात्मक विचार?

  1. विपरीत परिस्थितियां, 
  2. तबीयत खराब होने पर, एलर्जी, नींद की कमी, 
  3. अधूरा ज्ञान, सही जानकारी न होना, 
  4. अपने होने के ध्येय से परिचित न होना ऐसे क्षण ही हमें नकारात्मक विचारों के दल दल में हमें फंसाते हैं और यह विचार अवसाद का भी कारण बन जाते

क्या इन विचारों की आवश्यकता है?

इस प्रश्न का जवाब बिलकुल सीधा है - नहीं।

  1. यदि आपको किसी दूसरे व्यक्ति के खुशी से ईर्ष्या हो रही है या आपको किसी और के जीवन को अस्त व्यस्त देखकर ,उन्हें दुखित देखकर खुशी होती है तो निश्चित आप अपने अगले जन्म में मनुष्य योनि में जन्म लेने के लायक नहीं होंगे।
  2. जांच करें की की क्या तकलीफ है आपको दूसरों की खुशी से, अपने मन को टटोलें की वह कौन सी कुंठा है जो आपके मन में इस कदर घर कर गई है की आप पर ये आसुरी प्रवृत्ति हावी है। 
  3. उस कुंठित स्मरण को निकालकर फेंकने की कोशिश करें और अपने मन मस्तिष्क को पवित्र बनाने की कोशिश करें।

नकारात्मक विचारों को कैसे रोकें



क्या आप जानते हैं जीवन में कई चीजों की तरह, नकारात्मकता भी एक आदत बन सकती है। बार-बार किसी की आलोचना करना, मस्तिष्क में खौफनाक विचार आना और हर बात में इनकार करना हमारे दिमाग में एक तंत्रिका मार्ग बना सकते हैं जो उदासी को और नकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करते हैं। ये नकारात्मक प्रवृत्तियां हमारे मस्तिष्क को सच्चाई से अवगत होने के राह को अवरुद्ध कर देते हैं जिससे ये मानसिक विकार बन जाते हैं और फिर दिमाग को दुर्बल बनाने वाले इन नकारात्मक विचारों को रोक पाना नामुमकिन होता चला जाता है।


मुझे नकारात्मक विचार क्यों आते हैं?

नकारात्मक विचारों को नजरअंदाज न करें बल्कि उनका तिरस्कार करें और उसे करने के लिए सबसे पहले ये जानने की कोशिश करें की वो कहां से आ रहे हैं और ये कौन से विचार हैं क्योंकि ये हमारे अर्धचेतन मस्तिष्क (सबकॉन्शियस) से नहीं आते हैं न ही किसी रासायनिक कारण से ये हमारे मस्तिष्क में आते हैं। इसलिए इनको ना कहना सीखें।


खुद से बेहतर सकारात्मक अपेक्षाएं रखें क्योंकि नकारात्मक विचार आपके बेहतर भविष्य के लिए किसी भी तरह मदद नहीं करेगा।



यदि आप बेरोजगार हैं या अकेले हैं, और इसी तरह की अन्य विचार आपको सताते हैं हैं तो एक चीज याद रखें कि यह एक अस्थायी स्थिति है। भाग्य, समय, कौशल, लोग, जो कुछ भी आपको चाहिए चाहे वो प्यार हो, दोस्त हो या पैसा और स्वास्थ्य हो ईश्वर पर भरोसा रखें वो आपको हर चीज समय आने पर स्वयं दे देते हैं


 अतीत से सीख लें लेकिन अतीत की ही चीजों में न खोए रहें।


जब आपके विचार और भावनाएं अनुकूल नहीं होती हैं, तो पहले किसी और चीज या कार्य के बारे में सोचें और यदि आप कर सकते हैं तो कुछ भी जरूर करें स्वयं को व्यस्त करले ताकि इस समय मस्तिष्क के विचार रूक जाएं।



 यदि आप अच्छे विचारों के बारे में सोचने में नहीं सोच पा रहे हैं तो इसे रहने दें और अपने दिमाग को शांत रखें जब तक ऐसे विचार आपके दिमाग से न चले जाएं तब तक। आपका खून खौल सकता है गुस्से से या आप अपने विचारों के कारण खुद को अकेला महसूस कर सकते हैं और हो सकता है की आपको रोना भी आए तो आप इस स्थिति से निपटने के लिए रो भी सकते हैं आपके अंदर जो भी भावना है उसे बाहर निकलने दे दबाकर न रखें और इसी तरह जीवन में सदैव मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहें।



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