Thursday, March 18, 2021

मेडिटेशन की शुरुआत कैसे करें

 यदि आप भी मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं या डिप्रेशन महसूस कर रहे हैं तो निश्चित ही आप इससे मुक्त होने के उपाय को ढूंढ रहे होंगे और स्वयं को फिर से जीवित महसूस करना चाहते हैं तो आपको अवश्य प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए।


ध्यान प्राणायाम के लाभ

मैं अपने पिछले लेख में आपसे चर्चा कर चुकी हूं की किस प्रकार प्राणायाम से श्वसन क्रिया बेहतर होती है और आपका शरीर अधिक ऊर्जावान बनता है केवल शरीर नहीं आपके शरीर की अरबों धमनिया जो की अमूमन एक व्यक्ति के जीवन चक्र में किसी काम ही नहीं आती ध्यान से आप उन्हे भी अधिक क्रियाशील बना सकते हैं अपने अवसादित मस्तिष्क को स्वस्थ, सकारात्मक और तीव्र बना सकते हैं और इसके लिए आपको दिन में केवल दस मिनट ही देने होंगे। हमारा भौतिक शरीर (physical body) और दृश्य शरीर ( जो बाह्य रूप से दृष्टिगत है) 



ईन सभी को संचालित करने वाली है हमारी आत्मा यानी प्राणमय कोश। ये संचालन सम्पूर्ण रूप से अदृश्य होता है जिसे हम देख नही सकते और जिसकी हम कल्पना भी नहीं करते तो ये अदृश्य शक्ति कौन सी है? इसका संचालन कौन कर रहा है? और सभी प्राणियों में एक ही समय पर ये इतने बड़े पैमाने पर कैसे संचालित हो रहा बिना रुके क्या ये चमत्कार नहीं है? 

इसी क्रम में हमने इस अदृश्य शक्ति को ईश्वर का नाम दिया होगा जिसे हम नहीं देख सकते वो ईश्वर मतलब हमारा प्राण ही हमारा ईश्वर है और हमें इसे ही तो पहचानना है ना। अपने शरीर से अपने प्राण को जोड़ने का ही माध्यम है ध्यान।


कैसे करें ध्यान

उपनिषदों में उद्धरित ऋषियों के कथन हैं 


"प्राणो वाव जयेष्ठश्च श्रेष्ठश्च।"

"प्राणस्येदम वशे सर्वम यत त्रिदीवी प्रतिष्ठितम"

मातेव पुत्राण रक्षस्व श्रीष्च प्रज्ञांम च विधेही न इति


इसका अर्थ है की प्राण वायु जो की ज्येष्ठ में भी श्रेष्ठ है, प्राण के ही वश में ही सम्पूर्ण जग, और त्रिलोक की प्रतिष्ठा है और जिस तरह एक मां प्यार और ममता के भाव के साथ अपने बच्चों की रक्षा करती है उसी तरह प्राणवायु हमारी या हमारे शरीर की रक्षा करती है।

 

आप ध्यान करने का अभ्यास इस प्रकार शुरू कर सकते हैं:

1.रोजाना अपनी दिनचर्या में से केवल दस मिनट निकालें और एकांत में बैठें और अपनी आंखों को बंद करके शुरू शुरू में हो सकता है आपको मुश्किल लगे तो आप आंखे खोल कर भी इस अभ्यास को करें

2.ध्यान की मुद्रा को ग्रहण करें



3.सबसे पहले कोशिश करें अपने मन को शांत करने की

4.अपने मस्तिष्क में चल रहे सभी विचारों से कहें कि वो थोड़ी देर के लिए आपके मस्तिष्क को खाली करदे

5.महसूस करें की आपका मस्तिष्क अब पूर्णतः शून्य है और उसमें कोई भी विचार नहीं है

6.अब अपने शरीर और मन यानी जिससे आप बिना किसी ध्वनि के बात करते हैं जिसे हम मन में बात करना कहते हैं उसे स्वयं समझकर अपने स्थूल शरीर को केवल एक भौतिक संरचना समझे और खुद को कहें की आप एक happy soul हैं





7.धीरे धीरे आप स्वयं (शरीर) और ब्रह्म(आत्म या मन) में तालमेल बैठा पाएंगे और इसके अभ्यस्त हो जायेंगे

8.तब आप आंखे बंद करके अपने नाक के ऊपर और दोनों आंखों के बीच ध्यान केंद्रित करें और ऐसे ही अभ्यास करते रहे इस दौरान अपने मस्तिष्क को विचार शून्य ही रखें

9.किसी एक मंत्र का चुनाव करें जिसका उच्चारण आप आसानी से करले और उस मंत्र को उच्चारित करें




10.इस तरह आप ध्यान प्राणायाम के अभ्यस्त हो जायेंगे।


इससे होने वाले लाभ चमत्कार हैं, और जो मैने महसूस किया है वह ईश्वरत्व है, इसे ध्यान प्राणायाम के माध्यम से मैंने न सिर्फ अपनी इंद्रियों को बेहतर बनाया बल्कि इसने मेरे जीवन को एक नया आयाम दिया । मेरे व्यवहार में बहुत परिवर्तन आया मैं पहले की तरह बहुत जल्दी अस्थिर नहीं होती, मुझे स्थिति विचलित नहीं करती है मुझे ये एहसास हुआ की शारीरिक शरीर केवल दिनचर्या को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक माध्यम है जिसमे हमारा अदृश्य प्राणवायु सुरक्षित है।


आप खुद से पूछें क्या जब भी आप पर कोई मुसीबत आती है आप किसी एक निश्चित व्यक्ति या वस्तु को कहते हैं की ये है मेरी समस्या? क्या आपके समस्या का कोई चेहरा है? नही न ये सब अदृश्य है और हमारे अंतरात्मा ही इन चीजों से हमें मुकाबला करने के लायक हमें बनाती है हम समस्या को मुक्के या लात से मारकर नहीं भगाते है बल्कि उसे अपनी आत्मबुद्धि का प्रयोग करके भगाते हैं । 

हर रोज के अभ्यास से ऐसी ही बहुत सी चीजें आप अनुभव कर सकेंगे। एक मजबूत इच्छाशक्ति के साथ इसे आज से ही शुरू करें।





3 comments:

  1. बहुत अच्छे से समझाया है आपने , मै काफी कोशिश करता हूं लेकिन 5-7 मिनट मे मन भटकने लगता है, क्या करना चाहिए ?

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