Wednesday, March 24, 2021

The power of positivity in Hindi - साकारत्मक सोच की शक्ति

 सकारात्मक सोच क्या है?


सकारात्मक सोच एक मानसिक और भावनात्मक नजरिया है जो आशावादी और सकारात्मक विचारों पर केंद्रित है, और सकारात्मक परिणामों की अपेक्षा करता है।


सकारात्मक मानसिकता वाले लोग जीवन के आशावादी पहलू को देखते हैं और खुशी, स्वास्थ्य और सफलता का अनुमान लगाते हैं।


इन लोगों को विश्वास है कि वे किसी भी बाधा और कठिनाई का सामना करेंगे जो वे सामना कर सकते हैं।


सकारात्मक सोच की शक्ति का फायदा उठाने के लिए, आपको इसका अभ्यास करने की जरूरत है। केवल इसके अस्तित्व के बारे में आपको पता होना पर्याप्त नहीं है आपको यह विश्वास भी होना चाहिए कि यह काम करता है।


  जीवन के प्रति आपका नजरिया, खुद के प्रति आपका दृष्टिकोण और आपका आशावादी या निराशावादी होना । यह सब आपके स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।




 कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि आशावाद और निराशावाद जैसे व्यक्तित्व लक्षण आपके स्वास्थ्य और वेलनेस के कई फैक्टर्स को प्रभावित कर सकते हैं। सकारात्मक सोच जो आमतौर पर आशावाद के साथ आती है, प्रभावी तनाव प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। और प्रभावी तनाव प्रबंधन कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा है। यदि आप निराशावादी होते हैं, तो निराशा से ही सदेव घिरे रहते हैं जो और आप एक निराश जीवन जीते हैं - आप सकारात्मक सोच रखना और इसके साथ खुशहाल जिंदगी जीना सीख सकते हैं।


एक सकारात्मक आत्म-छवि एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण है। शोध से पता चलता है कि जो लोग अपने आप में आत्मविश्वास महसूस करते हैं वे समस्या को हल कर सकते हैं और बेहतर निर्णय ले सकते हैं, अधिक जोखिम उठा सकते हैं, खुद पर जोर दे सकते हैं और अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास कर सकते हैं। वास्तव में सकारात्मक मनोविज्ञान नामक एक संपूर्ण क्षेत्र है। यहां कुछ विचार दिए गए हैं जिनकी मदद से आप अधिक सकारात्मक हो सकते हैं और बेहतर महसूस कर सकते हैं।


अपने विचारों पर ध्यान दें


एक तकनीक जो आपको और अधिक सकारात्मक सोचने में मदद करेगी, वह है आपके नकारात्मक "सेल्फ इंटररोगेट" के बारे में जागरूक होना और नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों के साथ बदलना। कभी-कभी हम परिस्थितियों या अपने बारे में सबसे खराब कल्पना करते हैं और अक्सर इससे अनजान होते हैं कि ये नकारात्मक विचार हैं। सबसे पहले इन विचारों को पहचानना सीखें। फिर इन विचारों से प्रश्न करें कि क्या तुम इतने सार्थक हो जो में तुम्हे सोचूं?


सकारात्मक विचार वे हैं जो हमें अपनी प्रगति के बारे में अच्छा महसूस कराते हैं। छोटी छोटी चीजों के लिए खुद की तारीफ करने का समय निकालें।

यह सक्रिय रूप से सोचना महत्वपूर्ण है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं और यह आपके जीवन में कैसे चित्रित किया गया है।

  • नकारात्मक शब्दों के साथ सकारात्मक बातों को बदलें और अपने इस कला को विकसित भी करें। उदाहरण के लिए मैंने एक नकारत्मक वाक्य को साकार्तमकता में बदला जैसे , "मैं सुबह उठने से नफरत करती हूं" के स्थान पर मैंने कहां की मैं "एक नए दिन के लिए आभारी हूं।"
  • नकारात्मक विचारों को लिखें। उनका परीक्षण करें, और नकारात्मक विचारों को शांत करें।
  • अपने व्यक्तिगत और कामकाजी जीवन में संबंधों का मूल्यांकन करें, और अपने आप को उन लोगों के साथ रखें जो सकारात्मक भी हैं और आपका समर्थन भी करते हैं।
  • खुश, शांतिपूर्ण, प्यार, उत्साही जैसे शब्दों का उपयोग करके नकारात्मक विचारों को बदलने के लिए सकारात्मक विचारों को विकसित करें।
  • चिंतित, भयभीत, परेशान, थके, ऊब, नहीं, कभी नहीं, और नहीं कर सकते जैसे नकारात्मक शब्दों से बचें।
  • मुस्कुराना याद रखें, यह संक्रामक है। और मुस्कुराहट से अच्छा कोई संक्रमण नहीं हो सकता। ;)


अपने अंदर का कॉन्फिडेंस बनाएं


आत्म-सम्मान की कमी या खुद के बारे में बुरा महसूस करने से आप उन चीजों को करने से खुद को रोक देते हैं जिनसे आप प्यार करते हैं। इसके अलावा, आत्मसम्मान की कमी आपके परिवार और दोस्तों के साथ अच्छे संबंध विकसित करने में भी बाधा बन सकता है। एक आत्मसम्मान की कमी से जूझ रहे व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट का अनुभव होने की संभावना है जो उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करता है जिससे तनाव और चिंता होती है।


  1. "नहीं कर सकते" शब्द को "कर सकते हैं"’ के साथ बदलें।
  2. "मैं करने की कोशिश करूंगी" इस शब्द को "मैं अवश्य करूंगी" से बदलें।
  3.  अपने वर्तमान पर ध्यान दें।
  4. अपनी वर्तमान इच्छाओं की एक सूची बनाइए और उन्हें हासिल करने के लिए आप क्या करेंगे ये निर्धारित करें
  5. आपके लिए प्रत्येक दिन एक विशिष्ट समय निर्धारित करें।
  6. चीजों में अच्छाई ढूंढने की कोशिश करें।













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